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Sunday, 13 October 2013

मुक्तक -----
                समस्त भाषाओँ की सिरमौर है प्यारी भाषा हिंदी
                  वतन की विभिन्न भाषाओँ की संगम है प्यारी भाषा हिंदी
                  प्रेम ,माधुर्य ,अपनत्व, ममता की अमृत कलश है इसमें
                 गर्व करो , हिन्दुस्तान के माथे की बिंदिया है भाषा हिंदी
                  ------मंजु शर्मा 

2 comments:

  1. Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका mahfilejazbaat जी आपका और आपके कमेंट्स का मेरे ब्लॉग पर सदैव इंतजार और स्वागत है।

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