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Sunday, 13 October 2013

  मुक्तक ----
         फलक पर ऐ वतन तेरा नाम, धूमिल ना होने पाए
        वतन परस्ती भूले नेताओं से ,कोई गद्दारी ना होने पाए
        हम मर मिटते हैं मारते हुए, दुश्मनों को जब जब
        माँ लबों पर तेरे जय हिन्द हो, कोई दुखी ना होने पाए
      ----मंजु शर्मा
 मुक्तक ----
 बुझते हुए चिरागों को , जां-ए- रौशनी मिल जाये

खाक हुए अरमानों को ,तेज रवानगी मिल जाये

थरथराते अधरों को जो, तुम लबों से थाम लो

  रौशन करे दिल को ,सुकून रूहानी मिल जाए

-----मंजु शर्मा
  
     मुक्तक ----
                 अश्कों का समुन्दर है ,आशाओं की लहरें हैं,
                 ख्वाहिशों की कश्तियाँ हैं,चट्टानों से इरादे हैं,
                 अंधेरों उजालों से जंग की,प्यास अनवरत जारी रख
                 मोहब्बत की पतवार से, किस्से जीत के लिखने हैं
                 ----मंजु शर्मा
     मुक्तक ------
               चाँद जमीं पर उतर आया , झील में समाने को आतुर है

                तारे सवार हो चाँदनी पर , जल-क्रीड़ा करने में मगन हैं
                सुन माँझी सखा इन्हें बना ,आलिंगनबद्ध करलें जरा
                कश्ती को रफ़्तार दे दो तुम ,आसमां पे आशियाने बसाने है
                ----मंजु शर्मा   

   
  मुक्तक ----
        पूर्णिमा का चाँद फिर आ गया आसमां में , लग गया  झिलमिल तारों का मेला
        रजनीगंधा खिल उठे फिर मन-मंदिर में  , हो गया सुवासित सांसों का रेला
        स्पर्श तेरी मतवाली चाहतों का , अरमान मचल उठे भीगी हुयी सी रात में

        चाँदनी अठखेलियाँ करे बदन से मेरे, कायनात गा उठी लिए जज्बातों का रेला
         ----मंजु शर्मा
    
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  मुक्तक -----
                    चाँद ने बादलों का घूँघट खोला ,चाँदनी खिलखिलाने लगी
                    निशा ने बोझिल पलकें मूँदीं ,रविकिरण अम्बर-पनघट भिगोने लगीं
                    समीर ने ली मादक अंगड़ाई …,पंछियों ने मिलायी मीठी तान
                    अलसायी कलियाँ जो मुस्कुरायीं, सुप्त धरा खिलखिलाने लगीं
                    ----मंजु शर्मा


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मुक्तक ----
मुझमें नारहे कोई विकार , ऐ माँ जगदम्बे ऐसा वर दो
व्याप्त जो मुझमें अँधियारा , मिट जाए वो माँ ऐसा वर दो
तू ही जगज्जननी , है तू ही जग संहारक ,पाप विनाशक,मोक्षदायनी
तन, मन ,वाणी ना हो कभी विकृत ,ऐ माँ जगदम्बे ऐसा वर दो

--Inline image 1--मंजु शर्मा